Monday, 1 October 2012

कहाँ हो भगत जल्दी आओ,

एक बार फिर से वतन ने पुकारा है,
एक बार फिर बस तेरा ही सहारा है.
गांधीजी देखों क्या बोल रहे कोई नहीं सुन रहा,
भ्रष्टाचारी ही स्वयं को देश प्रेमी बोल रहा,

भूखा प्यासा रहके हाथ जोडके थक गए,
यहाँ तो सब बस लात मुक्के वाले रह गये,
कहते है ये की अब इनकी सरकार है,
लगता है इनको अब तुम्हारा इंतज़ार है...

राजगुरु, सुखदेव की तुम फिकर न करो,
आज हर हिन्दुस्तानी मरने को तैयार है,
कहाँ हो भगत जल्दी आओ,
अब बस तुम्हारा ही इंतज़ार है.
                         
                          -पंकज मिश्रा.

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