बापू ये क्या सीखा गए ...
जो तुमने किया वो तुम ही कर सकते थे,
तुम्हारी लाठी से तब के लोग डरते थे.
आज २ G और ३ G वाले ये लोग कुछ भी पचा लेते है
चारा नहीं मिलता तो कोयला भी खा लेते है.
राम का नाम लेने वाले मंदिर के बाहर सोते है.
डाकू और चोर अब महलों में होते है.
सरकारी दीवारों पे तेरी तस्वीर की ज्योति है,
बैमानों की कुर्सी उसी के निचे होती है.
आज अगर बापू तू कही जिंदा होता
चरखा चलाना छोड़ बन्दुक चला रहा होता.
सत्याग्रह की प्रेक्टिस तेरी भी छुट गयी होती,
निकल पड़ता लाठी लेके बाँध लेता धोती.
आज के हालत को अगर तू समझ पाया होता.
तो बापू I AM SURE तुने कुछ और सिखाया होता.
- पंकज मिश्रा.
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